दोस्तो पता नही कुछ अलगसी खुशी होती हैकिसी की हैल्प करके है ना?

कानपुर रेलवे स्टेशन पे गाड़ी जैसे
रुकी मैनें अपना बैग उठाया और निचे
उतरा.अभी बाहर जाने का रास्ता देख
रहा था कि देखा कुछ लोगो की भीड़ ने
एक आदमी को घेर रखा है.सोचा चलो देख
लेते है क्या माजरा है?मै भीड़ को चीरते हुऐ
आगे आया तो देखा एक अधेड़ उम्र
का आदमी पब्लिक कुर्सी पे बेहोश
सा पड़ा था.पुछने पे
पता चला कि जो पिछली गाड़ी गई है ये
उसके चालू डिब्बे मे बैठा सफर कर रहा था. अचानक हालत
खराब हो गई तो साथ के मुसाफिरो ने
यहा उतार दिया उन्होने
कहा था एक तो गाड़ी मे भीड़ बहुत है
उपर से ये गर्मी कही और हालत
खराब ना हो जाऐ तो ये सोच के उन्होने यहां उतार दिया.मैने सबसे
पहले पानी की बोतल
निकाली अपनी उसके मुँह पे छिटे मारे
ओर थोड़ा पानी पीलाया.एक अखबार से
उसको हवा डुलाई ओर बात करने
की कोशीश करने लगा.थोड़ा होश आने पे मैने पुछा कहा जाना है
भईया तो वो बोला बेटी की शादी है..
घर जाना है मैने कहा घर कहा है
तो वो नही बोला मैने सोचा इसे घर कैसे
पहुँचाया जाए
तो बाकी लोगो की मदद से मैने उसके बैग से टिकट निकाला वो अमृतसर
का था उसके मोबाइल से उसके घर
का नंबर लिकाल लिया .टिकट
उसकी जेब मे रखा ओर
पानी की बोतल ले के अमृतसर
वाली गाड़ी मे बिठा दिया.उधर उसके घर वालो को फोन करके बता दिया की वो उस
गाड़ी मे आ रहे है आप खुद लेने पहुँच
जाना उनकी हालत ठीक
नही है.बस मै अपने घर पहुचा अगले दिन
उसी आदमी का फोन आया धन्यवाद
किया ओर अपनी बेटी की शादी मे
बुलाया ताकि अपने घर वालो से
मिला सके.
दोस्तो पता नही कुछ अलग
सी खुशी होती है
किसी की हैल्प करके है ना?